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Thursday, 21 January 2016

अजूबे नक्षत्र और राशि



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हमारे दैनिक जीवन में चन्द्र राशी व नक्षत्र का बहुत बड़ा रोल होता है..यदि देखा जाए तो हम सभी इससे ही रोज संचालित होते हैं..एक तरह से यह हमारे डाइरेक्टर व निर्देशक हैं.
अनुभव तो यह भी बताता है कि यदि दशम मध्य में नक्षत्र का अध्यन किया जाए तो उससे बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है...
किन्तु चन्द्रमा हमारी मानसिकता को पहचान कर चलाता है.और चन्द्रमा नक्षत्रों के निर्देशानुसार व्यक्ति को गति देता है.
आप स्वयं देंखें जन्म राशी का चन्द्रमा जिस नक्षत्र से सम्बन्धित है तथा दशम का मध्यवर्ती अंश व उसके नक्षत्र का सम्बन्ध हो तो व्यक्ति अवश्य ही उस राशी व नक्षत्रों के अनुसार जीवन को ढालता है.........जैसेकि...
कृतिका नक्षत्र का प्रभावी व्यक्ति सूर्य व केतु से जरुर संचालित होगा...ऐसे लोग जौं,सूखे मेवा,ज्वेलरी,सैनिकों के साज-सामान बनाने का कार्य,दलाली.शेयर मार्केटिंग,आधिकार व अधिकारी,जैसे कार्यों से जुड़ा होता है
और यदि सूर्य 11-2 भाव में है तो पैत्रिक कार्य को सम्हालता है.
सूर्य -राहू की युति चिकत्सक का क्षेत्र देता है....
सूर्य और राहू कुण्डली में 6-8 से हों तो आई ए एस व लीडर होता है.
ऐसे कई अन्य व्यवसाय व कार्य हैं जिसे कृतिका मेष और वृष राशि के संग सूर्य से सम्बन्धित व्यक्ति से कार्य कराता है.

Wednesday, 20 January 2016

केतु और सम्बन्धित रत्न लहसुनिया

राहू-केतु में 2 तरह का अंतर है.राहू कार्य को रोकता है तो केतु कार्य को बढाता है.
कोई कोई ऐसी स्तिथी को पितृदोष भी मानते हैं..लेकिन मेरा स्वयं का अनुभव ऐसा नहीं मानता है.
केतु प्रेत,दुःख,दारिद्र्य,अनेक तरह की व्याधियां तथा विपत्तियों से भी सम्बन्धित है 
यदि कुण्डली में केतु खराब हो तो इससे सम्बन्धित रत्न लहसुनिया धारण किया जा सकता है जिससे इन परेशानियों में कमी या खात्मा हो सकता है.
सूर्य के साथ केतु की युति होने पर लहसुनिया पहनना चाहिय .हालांकि इस योग को कोई-कोई पितृदोष भी मानते हैं.
यदि केतु शुभ ग्रहों के साथ हो ,,खासकर कुण्डली के 2 प्रमुख ग्रह शुक्र-गुरु जो सुख व समृद्धि के कारक हैं इनके साथ केतु की युति अथवा सम्बन्ध हो तो इन ग्रहों का ताकत देता है अगर ऐसी स्तिथि में लहसुनिया पहना जाए तो ग्रहों की ताकत और बहु बढती है जिससे व्यक्ति को सम्बन्धित लाभ की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है.
केतु का अगर 1-4-9-10-11 से सम्बन्ध हो तो केतु चमत्कारी लाभ देता है.
ध्यान रखें ..........केतु झंडा है..और कार्तिकेय भगवान् से सम्बन्धित है.



राहू का कन्या से सिंह में आना

19 जनवरी को राहू कन्या का घर छोडकर सिंह के घर यानि अपने प्रबल शत्रु सूर्य के में आ रहे हैं.
राहू शनि वत ....मतलब... राहू शनि के स्वभाव का है और सूर्य -शनि में 36 का आंकड़ा है.राहू उससे भी बढ़कर क्यूंकि यह पितृदोष देता है.जबकिपंचम में राहू शुभ होता है..लेकिन पितृदोष व प्रेत बाधा तो देता ही है सिंह में 
.पंचम हमारा संतान,विद्या,शुभ त्रिकोण,तथा पूर्वार्ध भी है.इन सबसे सम्बन्धित बातों में बाधाएं व रुकावटों का आना स्वाभाविक है.
फिर भी उसे पाने के लिए व्यक्ति गूढ़ रहस्य की बातों तथा गुप्त योजनाओं की ओर आकर्षित होता है .चूँकि सूर्य तेजस्वी है इसके उपर सूर्य का प्रभाव भी आता है.गुप्त मंत्रणा में निपुण होता है ऐसे में व्यक्ति का महत्वाकांक्षाएं बढती हैं और षड्यंत्र का सहारा भी लेता है.11 th पर दृष्टी इन्कम के मामले में चतुराई व चोरी का भी सहारा ले सकता है.
संतान से कष्ट, पेट से सम्बन्धित समस्याएं आदि पीड़ा देंगीं.सर दर्द, सर से सम्बन्धित व्याधियां देगा,
लग्न पर दृष्टी झगडे का कारण व चोट-चपेट भी बन सकता है.
बड़े भाई कोकष्ट देगा..भाभी का स्वास्थ को प्रभावित करेगा,
भाग्य में अचानक उतार-चढ़ाव की स्तिथि पैदा होगी.
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उपाय <><><><><> रविवार को भूरे कुत्ते को मोतीचूर के लड्डू खिलाएं.
कुत्ते को मारें नहीं..
खाने वाली ..2 ...मूली शिव मंदिर में दान करें..



वृष लग्न के लिए सिंघम राहू

अध्यात्म व धार्मिकता में कमी रहेगी.जीवन में आपको बदलाव देखाई देगा जिसके कारण आ निराशा,भावनात्मक जुड़ाव से यदि आप किसी माया मोह में फंसे हुए हैं तो उससे निजात मि जायेगी.
गलत खान-पान जैसेकि...पान-मसाला,शराब व स्मोकिंग को छोड़ने की कोशिश में हैं तो थोड़ा कोशिश करेंगें यकीनन आपको उससे छुटकारा मिल जाएगा.
लेकिन आप किसी व्यवसायिक विस्तार,आर्थिक उन्नति के लिए कोई नया सोच पाले हैं,तथा परिवार आदि में तनाव रहेगा..किन्तु धैर्य से काम लेंगें तो कुछ राहत के संकेत भी हैं.
चौथा स्थान माता का भी है.इस कारण माँ को कष्ट अथवा हानि की आशंका है.
चौथा मन,सुख व वैभव भी है..इसमें कमी व अशांति होगी.
स्थान परिवर्तन भी कराएगा.
सिंह चूँकि चौथे में है इसका स्वामी सूर्य जो बॉस या यूँ कहूँ कि राजा है.और गोचरीय स्तिथि होने से चतुर्थ राहू नौकरी पेशा वालो के लिए शुभ है.राहू चालाक है इसलिए ओवरटाइम से आमदनी बहुत कराएगा.लेकिन टेबल बदल सकती है.
राजनीतिक व सामाजिक बातों में आपकी प्रमुखता बनेगी.क्यूंकि लग्न राहू के मित्र की है..उससे सम्बन्धित कुछ सुख भी देगा..
ध्यान...दें....यह कथन लग्न से है..किन्तु राश्यानुसार व दाशान्तर से फल कथन में अंतर आ सकता है



मिथुन लग्न के लिए सिंहम राहू

मिथुन का स्वामी बुध है और बुध से राहू दबता भी है..लेकिन सिंह राहू की शत्रु राशी है.तृतीय भाव छोटे भाई-बहन का होता है साथ ही पराक्रम का भी.
ऐसी स्तिथि में इस लग्न के व्यक्तियों के लिए कठिन परिश्रम,चूँकि राहू तिकड़मी है 
इसलिए साम-दंड-भेद सारे हथकंडे अपनाकर आर्थिक क्षेत्र में लाभप्रद साबित होगा.
जन्व्रू-मार्च और अगस्त में यदि कोई विद्यार्थी अथवा जॉब के लिए इन्टरव्यू आदि में लगा है तो उसे निश्चित ही राहू सफलता देगा.
लेकिन विद्यार्थी लोग स्टडी में लापरवाही न करें.क्यूंकि राहू विद्यार्थियों कन्फ्यूज करता है.खासकर लोजिक के मामले में.
यात्राएँ होंगीं.
भाई बहनों के लिए अच्छा नहीं है आपस में झगड़े-विवाद कराएगा.
पत्नी के स्वात को प्रभावित करेगा तथा पिता से मतभेद पैदा करेगा.
ध्यान...दें....इसका प्रभाव चन्द्र राशी के अनुसार कम ज्यादा भी हो सकते हैं.
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उपाय.......घर से सफ़ेद चंदन का टीका लगाकर निकलें.

कर्क लग्न में गोचरीय सिंघम राहू

यदि लग्न से गोचरीय स्तिथि में राहू को देंखें तो कर्कीय व्यक्ति किसी ख़ास से सम्बन्ध बनाकर
नयी उर्जा व प्रेरणा से प्रेरित होकर आगे बढ़ेगा.व्यापारिक लेन-देन व साझेदादरी में लाभ व संतोष जनक परिणाम को देखेगा.
छूटे हुए पुराने काम को पूरा करने केलिए भी यह समय अच्छा है
कोई नया विचार व सुझबुझ मन में आये तो तुरंत उसे अमल में लाये और सफलता से आगे बढे.
सिंह सूर्य है और वो आपके कुटुम्ब के घर में तथा पिता के कारक भाव से छठे है इस कारण कुटुम्ब व सुखों में कमी व हानि का संकेत भी है..इसलिए कर्कीय व्यक्ति को सूर्य को रोज जल देना चाहिए.
साथ ही केतु भी अष्टम में हैजिसके कारण दिनचर्या में कठिनायाइयों का भी सामना होगा.पेट के निचले हिस्से में अज्ञात बिमारी का भी खतरा है.
ध्यान....दें....यह कथन कर्क लग्न से है....चन्द्र से परिणामों में कुछ बदलाव भी सम्भव है
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उपाय....घर से निकलने से पहले सफ़ेद चंदन ललाट में लगाकर निकलें..रविवार को मीठी रोटी काले कुत्ते को खिलाएं...

श्री आदित्य का मकर में संक्रांति

मकर संक्रांति में सूर्य स्वयं के नक्षत्र में होते हैं.तथा मकर में 3 नक्षत्रों ( सूर्य-चन्द्र-मंगल ) का आगे आगे सम्मिलित होना होता है ये तीनो ही नैसर्गिक व कमोवेश मित्र हैं.सूर्य आत्मा,चन्द्र सोच व मंगल पराक्रमी होकर व्यक्ति जीवन को सुखमय व प्रभावशाली बनाता हैं.
इसलिए सूर्य को आत्मा,राज्य,पिता तथा यश का कारक माना जाता है कुण्डली में जब सूर्य की स्तिथि शुभ होती है तो निसंदेह इन सब वस्तुओं की प्राप्ति होती है.जबकि अशुभ सूर्य के कारण व्यक्ति को निराशा,ओजस्विता का नाश व अपयश से पीड़ा होती है.अशुभता में यदि सूर्य के साथ राहू-शनि हैं अथवा सम्बन्धित होते हैं तो परिणाम दृढ़ व कष्टदायी होते हैं.क्यूंकि राहू सूर्य का बल कमजोर कर लेता है बल्कि मेरा अनुभव है कि राहू चोर है इसलिए सूर्य के बल का क्षरण करके स्वयं बलवान हो जाता है.साथ ही सूर्य को राहू से 12 डिग्री पर आने से पहले ही दृष्टगत हो जाता है.
शनि सूर्य पुत्र है और मकर संक्रांति का मतलब एक तरह से सूर्य का पुत्र शनि के घर में आना है.जहां अनुशासन की जरूरत है.क्यूंकि पिता के घर में होने से सभी घर के लोग चिंतित व लयबद्ध हो जाते हैं.सूर्य स्वयं भी यहाँ प्रसन्न होता है.
सूर्य जडीबुटी भी है व रोग का क्षरण करता है इसका चर्म से गहरा सम्बन्ध है..साथ ही भीषण रोंगों का भी निवारक है.वर्तमान में शनि सूर्य से 11 वें हैं.जो लाभदायक हैं.शनि से सूर्य भी 3 रे हैं.अच्छा है..मकर राशि वालों के लिए शनि धनदायक है.आत्मविश्वास बढेगा,नयी नयी योजनायें बनेगीं.भाई बहनों के लिए भी अच्छा समय है.लेकिन मकर की औरते खासकर जो गर्भवती हैं उन्हें सावधानी की जरूरत है.
कमजोर की स्तिथि में आदित्य हृदय स्त्रोत् का पाठ करें
अपने पिता को सम्मान दें तथा उन्हें खुश रखें तथा आशीर्वाद लें.
नित्य सूर्य को जल दें..




गोचरीय वक्री गुरु तथा वक्रत्व स्वभाव

8 जनवरी की शाम 7 बजे गुरुदेव वक्री हो गए हैं.और 9 मई को मार्गी होंगें.
अगर देखा जाए तो वक्रत्व में गुरु को कोई फर्क नहीं पड़ता है बल्कि इनके शुभत्व में बढ़ोत्तरी होती है.हाँ...यदि कुण्डली में अशुभ है तो अशुभता बढ़ेगी.इसमें कोई संशय नहीं है..जैसेकि मान लो कि आजकल गुरु सिंह में है और मीन लग्न है तो मीन लग्न का व्यक्ति रोगादि व खर्च तथा कर्ज से पीड़ित होगा.कुटुम्ब की किसी बात को लेकर ( खासकर सन्तान,)से चिन्तिति रहेगा.
गुरु का वक्र्तत्व कभी कभी फलित में देरी भी करता देखागया है.
लेकिन इसके स्वभाव में बदलाव के साथ साथ अपने स्वभाव को सामान्य ही रखते हैं,
यदि वर्तमान में देखा जाए तो इस समय 1-6-9 राशि के लिए गुरु शुभ हैं क्यूंकि वर्तमान में गुरुदेव का पैर ताम्बे में है...
2-7-11 राशिवालों के लिए गुरुदेव भी बहुत अच्छे हैं क्यूंकि इस राशी से उनका पाँव चांदी में है.
3-5-10 राशि सेसम्बन्धित लोंगों के लिए काम-धंधे के लिए तो शुभ है लेकिन परिवार में तथामान-सम्मान के लिए थोडा कष्टदायी समय है साथ ही बेकार में इधर-उधर घुमने से कोई लाभ नहीं होने वाला है.
जबकि 4-8-12 राशि के लोंगों के लिए 8 महीने तनाव के होंगें.मान-सम्मान व आर्थिक तथा समाजिक और पारिवारिक तनाव तथा परेशानी रहेगी..

सिंघम राहू व सिंह लग्न

सिंह में राहू का आगमन तथा चन्द्रमा उस समय हस्त नक्षत्र और कन्या राशी में होगा.
यदि राशी से देंखें तो राहू कन्या से 12वें होंगें,लग्नवत लग्न में होंगें..
लग्नानुसार वाद-विवाद, नौकरीआदि में समस्याएं आयेंगीं तथा कोई गलत निर्णय से हानि की संभावना के भी संकेत हैं.व्यावसायिक मामले उतार-चढ़ाव के होंगें,तथा समस्याओं से दो-चार होनाहो सकता है.खासकर नौकरों से,,
राशि से देंखें तो व्यर्थ कीथकावट व दौड़-धुप रहेगी,नियम के काम प्रभावित होंगें.
लेकिन हिम्मत से काम किया जाए तो सफलता के भी संकेत हैं.,क्यूंकि..राहू में हठवादिता होती है..जो अन्दर ही अन्दर छुपी हुयी शक्ति का प्रभावशाली तरीके से कार्य करता है.