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Wednesday, 20 January 2016

श्री आदित्य का मकर में संक्रांति

मकर संक्रांति में सूर्य स्वयं के नक्षत्र में होते हैं.तथा मकर में 3 नक्षत्रों ( सूर्य-चन्द्र-मंगल ) का आगे आगे सम्मिलित होना होता है ये तीनो ही नैसर्गिक व कमोवेश मित्र हैं.सूर्य आत्मा,चन्द्र सोच व मंगल पराक्रमी होकर व्यक्ति जीवन को सुखमय व प्रभावशाली बनाता हैं.
इसलिए सूर्य को आत्मा,राज्य,पिता तथा यश का कारक माना जाता है कुण्डली में जब सूर्य की स्तिथि शुभ होती है तो निसंदेह इन सब वस्तुओं की प्राप्ति होती है.जबकि अशुभ सूर्य के कारण व्यक्ति को निराशा,ओजस्विता का नाश व अपयश से पीड़ा होती है.अशुभता में यदि सूर्य के साथ राहू-शनि हैं अथवा सम्बन्धित होते हैं तो परिणाम दृढ़ व कष्टदायी होते हैं.क्यूंकि राहू सूर्य का बल कमजोर कर लेता है बल्कि मेरा अनुभव है कि राहू चोर है इसलिए सूर्य के बल का क्षरण करके स्वयं बलवान हो जाता है.साथ ही सूर्य को राहू से 12 डिग्री पर आने से पहले ही दृष्टगत हो जाता है.
शनि सूर्य पुत्र है और मकर संक्रांति का मतलब एक तरह से सूर्य का पुत्र शनि के घर में आना है.जहां अनुशासन की जरूरत है.क्यूंकि पिता के घर में होने से सभी घर के लोग चिंतित व लयबद्ध हो जाते हैं.सूर्य स्वयं भी यहाँ प्रसन्न होता है.
सूर्य जडीबुटी भी है व रोग का क्षरण करता है इसका चर्म से गहरा सम्बन्ध है..साथ ही भीषण रोंगों का भी निवारक है.वर्तमान में शनि सूर्य से 11 वें हैं.जो लाभदायक हैं.शनि से सूर्य भी 3 रे हैं.अच्छा है..मकर राशि वालों के लिए शनि धनदायक है.आत्मविश्वास बढेगा,नयी नयी योजनायें बनेगीं.भाई बहनों के लिए भी अच्छा समय है.लेकिन मकर की औरते खासकर जो गर्भवती हैं उन्हें सावधानी की जरूरत है.
कमजोर की स्तिथि में आदित्य हृदय स्त्रोत् का पाठ करें
अपने पिता को सम्मान दें तथा उन्हें खुश रखें तथा आशीर्वाद लें.
नित्य सूर्य को जल दें..




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